भगवान महावीर ने कायोत्सर्ग को सभी दुखों से मुक्ति का मार्ग माना है: प्रो. साधु शरण सिंह सुमन

पटना/बाढ़: प्रिया सिंह

भगवान महावीर ने कायोत्सर्ग को सभी दुखों से मुक्ति का मार्ग माना है: प्रो. साधु शरण सिंह सुमन

बिहार/पटना: अनुव्रत विश्वभारती राजसमंद राजस्थान द्वारा संचालित अहिंसा प्रशिक्षण केंद्र बाढ़ द्वारा लॉकडाउन काल में ऑनलाइन एवं संचार के अन्य माध्यमों से लगातार जीवन विज्ञान प्रेक्षा ध्यान एवं योग का प्रशिक्षण दिया जाता रहा है। इस कड़ी के अंतर्गत आज केंद्र के मुख्य जीवन विज्ञान योग प्रशिक्षक प्रो० साधु शरण सिंह सुमन ने कायोत्सर्ग के अभ्यास का प्रशिक्षण दिया।

इस क्रम में उन्होंने बताया कि कायोत्सर्ग शरीर को शिथिल कर तनाव मुक्त, चिंता मुक्त और उपाधिजन्य रोग, भावनात्मक रोग से छुटकारा पाने का सर्वोत्तम मार्ग है। बहुत सारे लोग कायोत्सर्ग और श्वसन दोनों को एक ही मानते हैं। किंतु कायोत्सर्ग और श्वसन में बहुत अंतर है।बाहर से एक दिखाई जरूर देती है दोनों क्रिया किंतु दोनों पूर्णतः अलग-अलग है।

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श्वसन मुर्दे की तरह जड़वत होने का अभ्यास है, जबकि कायोत्सर्ग में शरीर के प्रति जो पकड़ है ममता है उसे छोड़ना पड़ता है। इसमें चेतना को बराबर जागृत बनाए रखना पड़ता है।यह तीन तरह से किया जाता है बैठकर, लेट कर और खड़े होकर। तीनों ही स्थिति में शरीर को स्थिर शिथिल और तनाव मुक्त करते हैं।मेरुदंड और गर्दन सीधी और मांसपेशियों को ढीला छोड़ देते हैं।

शरीर की पकड़ को छोड़ते हैं शिथिलता का अनुभव करते हैं चित्र को पैर से सिर तक क्रमशः प्रत्येक भाग पर ले जाते हैं और शिथिलता का मानसिक देते हैं। शरीर के सभी अंग शिथिल हो जाए प्रत्येक मांसपेशी और प्रत्येक स्नायु शिथिल हो जाए के सुझाव के साथ तीन ही स्थिति में बिल्कुल अडोल रहते हैं।

कायोत्सर्ग 5 मिनट से 45 मिनट तक का होता है प्रयोग के अंतर्गत बैठकर और पीठ के बल लेटकर अभ्यास कराया गया। भगवान महावीर ने कायोत्सर्ग को सभी दुखों से मुक्ति का मार्ग माना है। प्रेक्षा प्रणेता पूज्य गुरुदेव आचार्य महाप्रज्ञ ने कायोत्सर्ग को व्याधि आधि और उपाधि से छुटकारा पाने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग माना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत योगाचार्य उमानंद ने अपने विचार रखे। आभार ज्ञापन भारत विकास परिषद के बाढ़ शाखा अध्यक्ष सत्येंद्र प्रसाद सिंह ने किया।

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