जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है अवगुण, कभी भी छोटा नहीं समझें !

 

सुपौल/राघोपुर: विकास आनंद

जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है अवगुण, कभी भी छोटा नहीं समझें !

बिहार/सुपौल: चाणक्य कहते हैं अवगुण, रोग और शत्रु को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए। हमारे जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन अवगुण है। उसका त्याग कर देना चाहिए।

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गुरुवार को सिमराही स्थित विद्यालय विद्या निकेतन के बच्चों को संबोधित करते हुए उक्त बातें ऋषिकेश के संत ब्रह्मचारी हरि दास ने कही। उन्होंने कहा कि अपने सद्गुणों से ही कोई बड़ा व महान बन सकता है। सुबह सूर्योदय से पहले उठना और रात में जल्दी सोना चाहिए। हमे 6-7 घंटा नींद लेनी चाहिए। सुबह-सवेरे जो कार्य किया जाता है वह बढ़ता है।

छात्रों को सुबह नित्यकर्म करके पढ़ाई करनी चाहिए, इससे विद्या बढ़ती है। स्मरण शक्ति तेज होता है।
उन्होंने कहा कि माता-पिता, गुरु व बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने से आयु, विद्या, समाज में कृति आत्मबल में वृद्धि होती है। मन से किया गया अच्छा कर्म कभी निष्फल नहीं होता है। आलस्य का त्याग करके समय का सदुपयोग किया जाएगा तब ही सफलता मिलेगी।

अवसर पर विद्यालय के डायरेक्टर वैद्य रीतेश मिश्र, राजकुमार चाँद, रत्नेश मिश्र, प्रणव कुमार, प्रियंका कुमारी, विनीता कुमारी, काजल कुमारी, चांदनी कुमारी, राहुल कुमार, मिथिलेश, रौशन, राजन, सोनू, वेनुप्रिया, भाव्या चाँद, मानवी मेहता सहित अन्य मौजूद थे।

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