लगभग 500 महोगनी और लगभग एक सौ फलदार पौधे लगाकर समय का सदुपयोग किया: संजय कुमार मिश्र

सुपौल/राघोपुर: आशुतोष झा

लगभग 500 महोगनी और लगभग एक सौ फलदार पौधे लगाकर समय का सदुपयोग किया: संजय कुमार मिश्र

बिहार/सुपौल: प्रखंड क्षेत्र के परमानंदपुर पंचायत अंतर्गत अड़राहा गांव निवासी संजय कुमार मिश्र पिछले दो दशक से पर्यावरण के सुरक्षा में अपना अहम योगदान निभा रहे हैं। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच जारी लॉकडाउन के दौरान भी वे लगातार पौधारोपण के कार्य में लगे रहे। इस दौरान वे लगभग 500 महोगनी और लगभग एक सौ फलदार पौधे लगाकर समय का सदुपयोग किया है।

वहीं पर्यावरण के प्रति इनके रुझान को देखकर अन्य ग्रामीणों में भी पर्यावरण की सुरक्षा हेतु जागरूकता आ रही है। वहीं श्री मिश्र के द्वारा भी लोगों को जागरूक कर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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– शुरुआती दिनों से ही कृषि एवं पर्यावरण के क्षेत्र में संजय मिश्र की विशेष अभिरुचि रही। उन्होंने स्नातक की शिक्षा लेने के बाद अपने कार्य की शुरुआत मध्यप्रदेश से की, जहां उन्होंने मंथन ग्रामीण समाज सेवा समिति में बतौर समाज सेवक के रूप में कार्य करते हुए सैकड़ों किसानों को जैविक खाद निर्माण करने की विधि का प्रशिक्षण दिया एवं सैकड़ों एकड़ में वृक्षारोपण करवाया।

इनके कार्य को देखते हुए 2004 में संस्था ने भारत सरकार द्वारा प्रदत्त बायो डीजल प्रोजेक्ट में उन्हें बायो डीजल (जेट्रोफा) प्लांटेशन के लिए नियुक्त किया, जहां श्री मिश्र ने मध्यप्रदेश के ही सिरोंज जिला में 50 एकड़ के फॉरेस्ट रेंज में पौधा लगवाया। बंजर सा दिखने वाला पहाड़ी क्षेत्र आज भी हरा भरा है। जिसके लिए इन्हें मध्य प्रदेश प्रशासन के तरफ से सम्मानित भी किया गया। अपने समाज सेवा के क्रम में इन्होंने सात साल की सेवा में जैविक खाद निर्माण से लेकर वृक्षारोपण, औषधीय पौधों की खेती जैसे कई अन्य कार्यों का संपादन किया।

फिर कोसी आपदा के बाद अपने पैतृक गांव में रहते हुए कोसी क्षेत्र के दर्जनों गावों के सैकड़ों किसानों को हेल्पेज इंडिया के साथ मिलकर जैविक उर्वरक बनाने की तकनीक से लेकर जैविक कीटनाशक दवाई और वायोचार उर्वरक निर्माण करने की विधि सिखा रहे हैं। इन्होंने वर्ष 2012 में राजेंद्र कृषि विश्व विद्यालय पूसा से प्रशिक्षण प्राप्त कर विश्व विद्यालय के लिए सुपौल और अररिया जिले के प्रत्येक गांव से मिट्टी सैम्पलिंग कर विश्वविद्यालय को मुहैया करवाया।जिससे वहां जांचोपरांत कृषि मैप तैयार कर पोर्टल पर डाला गया है, जिससे इलाके के किसान अपने गांव के मिट्टी का मूल्यांकन कर सकते हैं।

अपने पिता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पंडित दयानंद मिश्र के समाजसेवी पदचिन्ह पर चलते हुए संजय मिश्रा बताते हैं कि आज जब कोरोना महामारी में लोग शुद्ध हवा के लिए तरस रहे हैं, कई लोगों ने अपनो को खो दिया, ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की ये जिम्मेवारी होती है कि वे वृक्षारोपण कर एक स्वच्छ समाज का निर्माण करे और समय का सदुपयोग करते हुए स्वच्छ पर्यावरण निर्माण में अहम भूमिका प्रदान करें।

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