औद्योगिक हब बनेगा ये जिला, जगी उम्मीद !

मुंगेर: सोनू झा

औद्योगिक हब बनेगा ये जिला, जगी उम्मीद !

बिहार/मुंगेर: सरकार के उदासीनता के कारण मुंगेर के हथियार बनाने वाले कारीगर हजारों की संख्या में जेल में बंद, कुटीर उद्योग मानकर मुंगेर के घर-घर में हथियारों का निर्माण होता आ रहा है।

उद्योग मंत्री ने मुंगेर में उठा ली हाथ मे बंदूक। कहा बंदूक कारखाना को मरने नहीं दिया जाएगा। यहां के कुशल कारीगरों के हाथों में जादू है। कारखाना के प्रतिनिधि मंडल को भी बुलाया पटना। आपको बता दें कि पूरे देश में मुंगेर को हथियार का मंडी के नाम से जाना जा रहा है। मुंगेर को असलाहो का शहर कहा जाता है।

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आज मुंगेर के हथियार बनाने वाले कारीगर जेल के सलाखों के पीछे बंद है। वजह बेरोजगारी के कारण अपने ही घरों में हथियारों का निर्माण कर अवैध सप्लाई करने के जुर्म में बंद है। यहां के कारीगर पिस्टल, एके-47, बंदूक ,कट्टा, कार्रवाईन तक बनाने की क्षमता रखते है।

बिहार सरकार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन मुंगेर किला परिसर स्थित बंदूक कारखाना का निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के क्रम में बंदूक कारखाना में रॉयल आर्म्स एंड कंपनी के यूनिट में शाहनवाज हुसैन पहुंचे ।वहां बंदूक निर्माण के बारीकियों के बारे में जानकारी लिया ।

निरीक्षण के क्रम में ही उद्योग मंत्री ने बंदूक कारखाना में तैयार एक नाली बंदूक को अपने हाथों में लेकर ट्रायल किया। बंदूक कारखाना के कारीगरों द्वारा एक नाली बंदूक को अपने हाथों में लेकर ट्रायल किए। उद्योग मंत्री बंदूक को कभी अपने हाथों में लेकर बन्दूक के ट्रिगर को दबाते तो कभी उसे लोड कर उनके बारीकियों को देखते।

कारखाना के कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि यह आधुनिक एक नाली बंदूक है। इसे मात्र 20 हजार रु में खरीदा जा सकता है। वहीं उद्योग मंत्री यहां के निर्मित बंदूकों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए, कारीगरों को शाबाशी देते हुए कहा कि यहां के कारीगर के हाथों में जादू है ,यहां कम कीमत पर ही एक नाली एवं दो नाली बंदूक बनाए जाते हैं जो बेहतर विकल्प है ।

कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 1925 में इस सभी इकाइयों को एकीकृत कर बंदूक कारखाना की स्थापना की गई थी। आरंभ में इस कारखाना में 36 इकाई थी जो वर्तमान में सिमटकर 4 इकाई में रह गई है। मुंगेर बंदूक पूरे भारत में प्रसिद्ध है।भारत में बिकने वाली बंदूकों की 50 फीसदी से भी ज्यादा बंदूकें अकेले मुंगेर की फैक्ट्री ही सप्लाई करती थी।सरकार ने यदि इंडस्ट्री को पुनर्जीवित नहीं किया तो यह इतिहास बन जाएगा। अब यह कारखाना अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है।

बोले उद्योग मंत्री

उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यहां के कुशल कारीगरों का हुनर को दम तोड़ने नहीं दिया जाएगा। इस उद्योग को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक प्रयास होगा।उन्होंने कहा कि कारखाना के विकास के लिए हमने कंपनी के अधिकारियों को पटना बुलाया है। वहां बैठक कर मुंगेर कारखाना के विकास के संबंध में रणनीति बनाएंगे।

गौरतलब हो कि 1925 में मुंगरे में बंदूक कारखाना की स्थापना की गई थी। शुरू में इस कारखाना में 36 इकाई थी। अब सिर्फ 4 इकाई रह गई है। पहले भारत में बिकने वाली बंदूकों की 50 फीसदी से भी ज्यादा सप्लाई मुंगेर के फैक्ट्री से होती थी। अब स्थिति काफी बदहाल हो गई है। मुंगेर में हथियारों का निर्माण मुगल शासक मीर कासिम ने शुरू कराया था।

मीर कासिम ने मुंगेर को कुछ दिनों के लिए अपनी राजधानी भी बनाया था। अंग्रेजों से इसकी सुरक्षा के लिए मीर कासिम ने अपने सेनापति गुरगीन खां को हथियारों का निर्माण करने वाले 18 कारीगरों के साथ मुंगेर भेजा। सेनापति ने यहां आकर स्थानीय लोगों को हथियार बनाने की ट्रेनिंग दी। उस समय हजारों लोगों ने हथियार बनाने के गुर सीखे। घर-घर हथियार बनाए जाने लगे। अंग्रेजों का जब शासन आया तो इसे एकीकृत किया गया। आजाद भारत में बंदूक कारखाना इन्हीं कारीगरों को लेकर बनाया गया।

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