भूतभावन भोलेनाथ का मास है श्रावण : आचार्य

gaurish mishra

सुपौल/करजाईन: गौरीश मिश्रा

भूतभावन भोलेनाथ का मास है श्रावण : आचार्य

बिहार/सुपौल : शिव तत्व प्राप्त करने का मास श्रावण मास 24 जुलाई यानि शनिवार से आरंभ हो रहा है।

श्रावण मास में आशुतोष भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है। इस मास में जो प्रत्येक दिन पूजन ना कर सके, उन्हें सोमवार को शिव पूजा अवश्य करनी चाहिए। सोमवार को व्रत रखकर शिव आराधना, अभिषेक एवं शिव का विशेष पूजन अवश्य करनी चाहिए।

श्रावण मास एवं शिव माहात्म्य का वर्णन करते हुए आचार्य पंडित धर्मेन्द्रनाथ मिश्र ने बताया कि श्रावण मास में जितने भी सोमवार पड़ते हैं, उन सब में शिवजी का व्रतोपवास किया जाता है। इस व्रत में प्रातः स्नान, गंगा स्नान अन्यथा किसी पवित्र नदी, सरोवर या विधि पूर्वक घर पर ही स्नान करके शिवालय जाकर यथा विधि षोडशोपचार पूजन, अभिषेकादि करना चाहिए। तदुपरांत श्रावण मास महात्म्य शिव महापुराण की कथा सुनने का भी विशेष महत्व है। भगवान शिव का यह व्रत सभी मनोकामना को पूर्ण करने वाला है।

SS BROAZA HOSPITAL
SS BROAZA HOSPITAL
Sai-new-1024x576

 

इस मास में की गई कोई भी साधना पूर्ण फलदायी होती है, क्योंकि इस मास का प्रत्येक दिवस सर्वकामना सिद्धि प्रदायक अमृत महोत्सव की गरिमा को अपने अंदर समेटे हुए होता है। श्रावण मास भूतभावन भोलेनाथ का मास है। आचार्य ने कहा कि यह आवश्यक नहीं कि किसी समस्या या पीड़ा के समय ही ईश्वर को याद किया जाए। बिना किसी आवश्यकता के भी हमें ईश्वर को याद करना चाहिए क्योंकि जहां शिव है वहां सब कुछ है। जनकल्याण एवं मोक्ष के लिए शिव आराधना शुभ कल्याणकारी है।

इसलिए श्रावण मास का इंतजार सभी उत्सुकता के साथ करते हैं। श्रावण के महीने में चारों और प्राकृतिक हरियाली, रिमझिम बरसती बरसात की बूंदे मन को अतिशय शांति प्रदान करती है। श्रावण मास में जितने भी सोमवार पड़ते हैं, उन सब में शिवजी का व्रतोपवास किया जाता है।

इस व्रत में प्रातः स्नान, गंगा स्नान अन्यथा किसी पवित्र नदी, सरोवर या विधि पूर्वक घर पर ही स्नान करके यथा विधि षोडशोपचार पूजन, अभिषेकादि करना चाहिए। तदुपरांत श्रावण मास महात्म्य शिव महापुराण की कथा श्रवण करें।

कैसे करें भगवान आशुतोष की आराधना

आचार्य ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर इस बार भी मंदिरों में विशेष प्रतिबंध है। इसलिए पूर्ण आस्था के साथ घर में ही भगवान आशुतोष की आराधना करें। इस पूरे मास में श्रद्धापूर्ण एवं विधिविधान पूर्वक दूध, दही, घी, मधु, गुड़, पंचामृत, भांग इत्यादि के द्वारा पूजा-अर्चना की जाए तो निश्चित रूप से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ऐसे पूजन से ना केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि उस व्यक्ति पर पूर्ण जीवनकाल तक लक्ष्मीजी की भी कृपा बनी रहती है। क्योंकि माता पार्वती स्वयं लक्ष्मी स्वरूपा हैं।

इस बार चार सोमवारी का योग

आचार्य धर्मेंद्रनाथ ने बताया कि इस बार श्रावण मास में चार सोमवार का योग है।

प्रथम सोमवारी – 26 जुलाई को है। दूसरा सोमवार 2 अगस्त को है, तीसरा सोमवार – 09 अगस्त एवं चौथी सोमवारी 16 अगस्त को है, जो सर्वार्थ सिद्धि योग से पूर्ण है। साथ ही आचार्य ने बताया कि श्रावणी पूर्णिमा दिनांक 22 अगस्त को होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!