ग्रामीण अस्पताल हो रहे विलुप्त, खंडहर में तब्दील हुआ चंपानगर पंचायत का दशकों पुराना अस्पताल !

सुपौल/राघोपुर: विकास आनंद

ग्रामीण अस्पताल हो रहे विलुप्त, खंडहर में तब्दील हुआ चंपानगर पंचायत का दशकों पुराना अस्पताल !

बिहार/सुपौल: बिहार प्रदेश के सबसे विकासशील जिलों में शुमार सुपौल जिला का सबसे प्रगतिशील प्रखण्ड है राघोपुर। राघोपुर प्रखण्ड का क्षेत्र जिले से केन्द्र बसा हुआ है। लेकिन सबसे उन्नत कहे जाने वाला प्रखण्ड राघोपुर का चंपानगर पंचायत अभी भी विकास की राह से कोशों दूर है। वैश्विक महामारी कोरोना के इस दौर में किसी भी क्षेत्र के विकास का पैमाना वहां के स्वास्थ्य सुविधा से ही देख रहे हैं।

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केन्द्र और राज्य सरकार ने हर जगह नए स्वास्थ्य केंद्रों की शुरुआत की है और बन्द या बेकार पड़ा स्वास्थ्य केन्द्रों को शुरू भी कर दिया है। बावजूद इसके चंपानगर पंचायत के सातनपट्टी गांव में 1960 में स्थापित अस्पताल आज पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गया है। सातनपट्टी गावँ के निवासी संतोष कुमार झा बताते हैं कि साल 1990 के आसपास इस अस्पताल में डॉक्टर कंठ जी और दास जी कम्पाउण्डर रहते थे और यहाँ दवा भी मिलता था।

आज अभी के इस महामारी के समय खंडहर में तब्दील इस अस्पताल के मकान के आगे बालू गिट्टी का ढेर लगा हुआ है जिससे कि गांव के सड़क का निर्माण हो रहा है। चंपानगर निवासी प्रदीप चौधरी और रणजीत चौधरी बताते है कि चंपानगर पंचायत में छुटभैये नेताओं की कमी नही है लेकिन इस महत्वपूर्ण मुद्दे के प्रति कोई भी जनप्रतिनिधि गंभीर नही है।

स्थानीय निवासी जगरनाथ झा, अमरेन्द्र झा, रौशन कुमार, विनय कुमार, मिथुन कुमार, सुभाष झा, दिलखुश कुमार बताते हैं कि अभी संभवतः हरेक घर में सर्दी, खाँसी,बुखार से पीड़ित व्यक्ति है। किसी को कोरोना जाँच तो किसी को कोविड वैक्सीन की आवश्यकता है, इन सारी मूलभूत आवश्यकतओं के लिए ग्रामीणों को बीस किलोमीटर दूर राघोपुर जाना पड़ता है।

चंपानगर के सभी ग्रामीणों ने सरकार से गुहार लगाई है कि इस खंडहर अस्पताल का कायापलट कर प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेन्द्र बनाया जाए और इस गावँ के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराया जाए।

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